Pakistan : डिजिटल जनगणना चुनावों में देरी, क्या ‘सेंसस’ की आड़ में होगी नवाज शरीफ की राजनीति में वापसी, जानें पूरा मामला

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नई दिल्ली. बीते शनिवार को जहां पाकिस्तान (Pakistan) के एक शीर्ष संवैधानिक निकाय ने नई जनगणना (Digital Cencus) के नतीजों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी, जिससे अब इस पडोसी देश में आम चुनाव में थोड़ा और समय लग सकता है। दरअसल यहां के PM शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में ‘काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट’ (CCI) की हुई बैठक में योजना मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान की आबादी 24.01 करोड़ हो गई है। 

डिजिटल जनगणना या राजनीति

वहीं इस ख़ास इस बैठक में कैबिनेट मंत्रियों, प्रांतीय मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में शामिल हुए सभी लोगों ने सर्वसम्मति से बीते मार्च और अप्रैल में की गई जनगणना के नतीजों को मंजूरी दे दी। दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने कहा था कि पाकिस्तान में आगामी चुनाव 2023 की डिजिटल जनगणना के आधार पर ही होंगे।

वहीं इस मीटिंग में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने आगामी 9 अगस्त को नेशनल असेंबली को भंग करने का ऐलान किया। यह निर्णय बीते गुरुवार रात संसद सदस्यों के सम्मान में हुए डिनर और नेताओं से मुलाकात के बाद आया। इस दौरान शाहबाज ने मीटिंग में मौजूद लोगों से देश की राजनीतिक हालात गहन चर्चा की गई।

क्या राष्ट्रपति की सच में होगी कोई भूमिका 

चर्चा है कि, 9 अगस्त को प्रधानमंत्री शाहबाज नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए राष्ट्रपति को औपचारिक सलाह भेजेंगे। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार इसे प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रपति को 48 घंटों के भीतर सलाह पर हस्ताक्षर करना होगा। वहीं खबर है कि, यदि किसी भी कारण से राष्ट्रपति सलाह पर हस्ताक्षर नहीं करते हैं, तो यह विधानसभा अपने आप ही भंग हो जाएगी। इसके साथ, अगर राष्ट्रपति इस नाम पर सहमत नहीं होते हैं, तो पाकिस्तान चुनाव आयोग प्रस्तावित नामों में से केयरटेकर PM के लिए कोई एक उम्मीदवार को चुनेगी।

चुनाव में होगी और भी देरी 

जानकारी दें कि, इस बाबत जनगणना कर्मियों ने घर-घर जाकर आंकड़े जुटाए हैं, जबकि लोगों के पास ऑनलाइन माध्यम से भी अपने परिवार का विवरण देने का विकल्प था। इसके बाद पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ECP) के लिए जरूरी है कि वह चुनाव के लिए पूरे देश में नए चुनावी जिलों को निर्धारित करने के वास्ते परिसीमन की कवायद नए सिरे से शुरू करे, जिससे नेशनल असेम्बली (संसद) का मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद 60 या 90 दिन की अवधि में चुनाव कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

इस बाबत पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने चुनाव में देरी की वजह बताई। उन्होंने साफ़ कहा कि, 2023 डिजिटल जनगणना के आधार पर आम चुनाव 2024 के जनवरी या फरवरी से पहले संभव नहीं है। कानून मंत्री ने कहा कि, जनगणना की पूरी प्रक्रिया 150 से 165 दिनों से ज्यादा नहीं चलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आम चुनाव कराने के लिए 54 और दिनों की आवश्यकता है।

डिजिटल जनगणना की आड़ में नवाज शरीफ की वापसी 

गौरतलब है कि, बीते मार्च को पाकिस्तान ने अपनी पहली डिजिटल जनगणना और आवास गणना की शुरुआत की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि,  यह कवायद भविष्य की योजनाएं बनाने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में मददगार साबित होगी। उनका यह भी कहना था कि, आंकड़े एकत्र करने की यह पारदर्शी प्रणाली भविष्य की योजनाएं बनाने और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में मददगार साबित होगी। 

हालांकि इस बीच इस इस बीच, कई लोगों का मानना ​​है कि इस डिजिटल जनगणना का साल मंसूबा कुछ और है। दरअसल  PML-N यह सुनिश्चित करने के लिए देरी पर जोर दे रही है कि, इसकी आड़ में उसके सुप्रीमो और बदनाम पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ अपनी राजनीतिक वापसी कर सकें। वहीं इस महीने की शुरुआत में, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यह साफ़ कर दिया था कि, उनके बड़े भाई अगले आम चुनाव में पार्टी का मुख्य चेहरा होंगे।

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