विश्व में अब तक का सबसे गर्म दिन रहा 3 जुलाई, ठंड वाली जगह अंटार्कटिका में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड

विश्व में अब तक का सबसे गर्म दिन रहा 3 जुलाई, ठंड वाली जगह अंटार्कटिका में गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड

नई दिल्ली: जून के मध्य में हुई बारिश अब मानों थम सी गई है। वही भारत के कुछ हिस्सों में इस वजह से उमस भरी गर्मी हो रही है जिससे लोग बहुत परेशान  हो रहे है। ऐसे में अब अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर एनवायरनमेंट प्रेडिक्शन की ओर से एक रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में अब तक का सबसे गर्म दिन सोमवार यानी 3 जुलाई रहा है। जी हां आइए जानते है क्या कहती है ये रिपोर्ट… 

विश्व स्तर पर अब तक का सबसे गर्म दिन

एनवायरनमेंट प्रेडिक्शन की ओर से आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को पूरी दुनिया में यानी विश्व स्तर पर अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए यूएस सेंटर ने कहा है कि दुनिया भर में लू की वजह से वैश्विक औसत तापमान 17.01 डिग्री सेल्सियस (62.62 फ़ारेनहाइट) तक पहुंच गया है, जो अगस्त 2016 के 16.92C (62.46F) के रिकॉर्ड को पार कर गया है। 

इन देशों में पड़ रही भीषण गर्मी

आपको बता दें कि भारत ही नहीं बल्कि गर्मी से दुनियाभर के देश परेशान हैं। जी हां बता दें कि दक्षिणी अमेरिका भी पिछले कई सप्ताह से भीषण गर्मी से जूझ रहा है, जबकि चीन में तापमान 35C (95F) से ऊपर गया है। इसके साथ ही यहां लू का प्रकोप भी हो रहा है। उधर उत्तरी अफ्रीका में तापमान 50C (122F) के करीब पहुंच गया है। हैरानी क  बात तो यह भी है कि इसके अलावा अंटार्कटिका जहां हमेशा बर्फ जमी रहती है। वहां भी बढ़ते तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 

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यहां भी गर्मी से बुरा हाल

इतना ही नहीं बल्कि इसके अलावा अंटार्कटिका में इनदिनों सर्दी पड़ रही है लेकिन यहां असामान्य रूप से अब तक का सबसे उच्च तापमान रिकॉर्ड किया गया है। श्वेत महाद्वीप के अर्जेंटीना द्वीप समूह में यूक्रेन के वर्नाडस्की रिसर्च बेस ने हाल ही में 8.7 डिग्री सेल्सियस (47.6F) तापमान रिकॉर्ड किया गया है।  जो जुलाई के महीने में अब तक का सर्वाधिक तापमान है। इस तरह पूरी दुनिया गर्मी से जूझ रही है। 

 ‘मौत की सजा है’

ऐसे में अब ब्रिटेन के इंपीरियल कॉलेज लंदन में ग्रांथम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट चेंज एंड द एनवायरमेंट के जलवायु वैज्ञानिक फ्रेडरिक ओटो का कहना है कि, “यह कोई मील का पत्थर नहीं है जिसका हमें जश्न मनाना चाहिए, यह लोगों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मौत की सजा है।” वहीं इस पर बात करते हुए आगे उन्होंने कहा कि ”उभरते अल नीनो पैटर्न के साथ जलवायु परिवर्तन इसके लिए जिम्मेदार है।

और बढ़ेगा तापमान 

बर्कले अर्थ के एक रिसर्च वैज्ञानिक जेके हॉसफादर ने कहा कि, “ये दुर्भाग्य है कि इस साल दर्ज किया गया रिकॉर्ड इस श्रृंखला का पहला दावा है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड और ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के साथ-साथ बढ़ती एल नीनो घटना ने तापमान को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जो आने वाले दिनों में और बढ़ेगा”

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