लिवर Liver को बीमार कर रही शराब और बदलती जीवन शैली

MBBS, MD (General Medicine)

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नई दिल्ली: समय बहुत तेजी से बदल रहा है. कल तक जिसे ऐब समझा जाता था, आज वही आधुनिक संस्कार या पार्टी कल्चर है. लेकिन व्यक्ति का शरीर और उसके भीतरी अंगों की कार्य प्रणाली नहीं बदली है, उनके काम करने का तरीका आज भी वही है, जो जन्म के समय या हमारे पूर्वजों के समय था. बदलते समय और खराब होते लाइफस्टाइल ने शरीर के अंगों की कार्य क्षमता को प्रभावित जरूर किया है. जिसके कारण लोग बहुत कम उम्र में बहुत सारी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.

इनमें लीवर सम्बंधित बीमारियां भी शामिल हैं. शराब के बढ़ते चलन और गलत खान-पान ने लीवर को बर्बाद कर दिया है. एलेक्सिस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएन्टेरोलॉजिस्ट एवं लिवर विशेषज्ञ, डॉ. अमित गुल्हाने कहते हैं कि शरीर के महत्वपूर्ण और प्रयोगशाला कहे जाने वाला अंग लीवर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, विषैले पदार्थ को फिल्टर करता है, डाइजेशन में मदद करता है और संक्रमण को कंट्रोल करता है. इसलिए लिवर में होने वाली खराबी शरीर के लगभग सभी हिस्सों को प्रभावित करती है.

 क्यों  होती  है  लीवर  की  बीमारी ?

डॉ. गुल्हाने कहते हैं कि लीवर की बीमारियों का एक प्रमुख कारण एल्कोहॉल है, जो लीवर सिरॉसिस के सबसे सामान्य कारणों में से एक है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लीवर बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी देखने को मिल रही है. इस संख्या में आई तेजी का मुख्य कारण व्यक्तित्व के अप्रभावी में परिवर्तन और खानपान की खराब आदतें हैं. इसकी वजह से मोटापा सहित अन्य तरह की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. लीवर खराब होने का सबसे पहला चरण फैटी लीवर होता है. इस स्टेज में मरीज ठीक हो सकता है और स्वस्थ जीवन जी सकता है, लेकिन इसके बाद होने वाली अवस्था में लीवर फाइब्रॉसिस, लीवर सिरॉसिस और लीवर कैंसर का रूप भी ले सकता है. फैटी लीवर में लीवर की कोशिकाओं में बहुत ज्यादा फैट जमा हो जाता है. इस बीमारी के कारण लीवर सही तरीके से काम नहीं कर पाता हैं और कई समस्याएं भी होने लगती हैं.

क्या  फैटी  लीवर  ठीक  हो  सकता  है ?

लाइफस्टाइल में बदलाव करके फैटी लीवर को ठीक किया जा सकता है. हर इंसान के स्वस्थ लीवर में थोड़ी मात्रा में फैट होता ही है लेकिन जब ये मात्रा लिवर के कुल वजन की तुलना से अधिक बढ़ जाता है, तो मुसीबत पैदा करता है. शराब सेवन के साथ डीप फ्राइड और जंक फूड जैसी चीजें खाने से लीवर सख्त हो जाता है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति की दिक्कतें बढ़ने लगती है. शराब और धूम्रपान पर विराम लगाने के साथ खानपान में बदलाव करके भी हम एल्कोहॉलिक लीवर की बीमारी से बच सकते हैं.

फैटी  लिवर  डिजीज  किस  तेजी  से  बढ़  रही  है ?

डॉ. गुल्हाने बताते हैं कि आज हर 5 में से 1 इंसान इस बीमारी का सामना कर रहा है. हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल, डायबिटीज, स्लीप एपनिया, अंडरएक्टिव थाइरॉयड फैटी लिवर डिसीज के कुछ कारण हो सकते हैं. फैटी लिवर डिसीज दो प्रकार के होते है: नॉन-एल्कोहॉलिक और एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिसीज. शुरुआत में लोग इस ओर ध्यान नहीं देते. अगर शुरुआत में ही इस बारे में पता चल जाये, तो एक स्वस्थ लाइफ जी जा सकती है. अत्याधिक शराब पीने से लीवर की कोशिकाएं डैमेज होती हैं. हालांकि लीवर खुद अपने आपको रिकवर कर लेता है, लेकिन अगर कोई अधिक शराब पीता है तो उसकी यह क्षमता भी खत्म हो जाती है.

क्या  बच्चों  में  भी  इस  बीमारी  के  संकेत  बढ़  रहे  है ?

कोविड के बाद से बच्चों में भी इसके लक्षण देखे जा रहे हैं. इसमें सबसे बड़ा कारण है बच्चों का बाहर खेलने के बजाय मोबाइल, टीवी और वीडियो गेम्स में लगे रहना जिस वजह से उनमे मोटेपन की शिकायत काफी अधिक बढ़ गयी है. वहीं केक, जंक फूड और कोल्ड ड्रिंक जैसी प्रिजरवेटिव चीजों के सेवन से उनमें फैटी लीवर का बढ़ता प्रमाण देखा जा रहा है. 6 वर्ष से लेकर 16 वर्ष तक के बच्चों में इस तरह के लक्षण देखे जा रहे हैं. बच्चे हों या बड़े सभी को ताजे फलों का सेवन ही करना चाहिए. प्रिजरवेटिव चीजों की समय सीमा का पता नहीं होने के चलते वे हमारे शरीर के लिए काफी खतरनाक होती है.

एल्कोहल  कितना  सेफ  है ?

शरीर के एल्कोहल कभी भी और किसी भी मात्रा में सेफ नहीं है. शराब सबसे ज़्यादा तब नुकसान करती है जब कोई उसे बिना खाने खाये ले. यूरोपियन स्टडी के अनुसार यदि कोई पुरुष हफ्ते में लगातार 5 दिन 90 एमएल (45 ग्राम) शराब लेता है, तो 10 वर्ष में उसका लीवर खराब होने की पूरी संभावना रहती है. इसी तरह अगर कोई महिला हफ्ते में लगातार 5 दिन, 25 ग्राम शराब का सेवन करती हैं, तो उसका भी लिवर इतने ही समय में खराब हो सकता है. अगर कोई काफी वर्षों से अधिक मात्रा में शराब पी रहा है तो उसे कम करने या रोकने की सलाह दी जाती है.

कैसे  पता  चलते  हैं  इसके  लक्षण ?

व्यक्ति को कमजोरी, थकावट, पेट में एक तरफ दर्द, मल में खून आना, भूख न लगना, बेवजह बीमार जैसा महसूस होना जैसे लक्षणों से इस साइलेंट बीमारी का पता चलता है. इस तरह के लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए. लीवर को स्वस्थ रखने से विभिन्न बीमारियों से बचाव किया जा सकता है. लोगों को लीवर से संबंधित बीमारियों और सावधानियों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा.

क्या  दवा  ही  इस  बीमारी  का  एकमात्र  पर्याय  है ?

डॉ. गुल्हाने बताते हैं कि इस बीमारी का दवा ही एकमात्र पर्याय नहीं है. दवा के साथ साथ 2 टाइम अच्छा भोजन करना, साइकिलिंग, वॉकिंग, बैडमिंटन जैसे रोज व्यायाम करने से व्यक्ति तंदुरुस्त रह सकता है. व्यक्ति को जब समय मिले, तब व्यायाम करना चाहिए. इसे अपने रूटीन में शामिल करना चाहिए.

एलकोहॉल ये बीमारी किसी एक की ज़िन्दगी ख़राब नहीं करती है, बल्कि ये पुरे परिवार का नुकसान करती है. इससे बचाने के लिए किसी एक इंसान के सुधरने से नहीं होगा, पुरे परिवार की मानसिकता को भी समझना पड़ेगा. इसमें हमारी सारकर भी कदम बढ़ा के हमारी मदद कर सकती है जैसे एलकोहॉल के विज्ञापन को रोकना, सोशल मीडिया में इसका प्रचार न होने देना

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