निधि वितरण: डीपीडीसी DPDC की बैठक में पालकमंत्री व विरोधी पक्ष नेता के बीच जोरदार बहस, एक-दूसरे पर भडके

निधि वितरण: डीपीडीसी की बैठक में पालकमंत्री व विरोधी पक्ष नेता के बीच जोरदार बहस, एक-दूसरे पर भडके

छत्रपति संभाजीनगर: जबसे ठाकरे व शिंदे गुट निर्माण हुआ, तबसे दोनों दलों के नेताओं के बीच अब तक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। लेकिन, औरंगाबाद में सोमवार को संपन्न हुई जिला नियोजन समिति की बैठक में विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे, ठाकरे गुट के विधायक उदय सिंह राजूपत व शिंदे गुट के जिले के पालकमंत्री संदिपान भुमरे के बीच जोरदार कहासुनी हुई।

इस बहस को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडिओं में विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे पालकमंत्री भुमरे के पास पहुंचकर जमकर चीख पुकार करने लगे। दानवे का जवाब भी भुमरे ने अपनी तिखी आवाज में दिया, जिससे बैठक में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी थी।

सोमवार को जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जिला नियोजन समिति की बैठक में ठाकरे गुट के कन्नड निर्वाचन क्षेत्र  के विधायक उदयसिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि पालकमंत्री संदिपान भुमरे जानबुझकर कन्नड के विकास के लिए निधि नहीं दे रहे है। इसको लेकर पहले विधायक राजपूत व पालकमंत्री के बीच बहस हुई।

इसमें ठाकरे गुट के विरोधी पक्ष नेता अंबादास दानवे शामिल हुए, और उन्होंने पालकमंत्री के साथ विवाद खडा किया। इसी विवाद में दानवे पालकमंत्री के करीब पहुंचे, जिससे उन दोनों के बीच जोरदार बहस हुई। इस बहस में सिल्लोड के विधायक तथा राज्य के अल्पसंख्यक मंत्री अब्दुल सत्तार पालकमंत्री भुमरे का साथ देने लगे। बैठक में उपस्थित अन्य जन प्रतिनिधियों ने समझा बुझकार मामला शांत किया। 

जिले के जहागिरदार नहीं है पालकमंत्री 

बैठक में अंबादास दानवे ने पालकमंत्री भुमरे पर राग अलापते हुए कहा कि तुम पालकमंत्री है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप जिले के जहागिरदार है। सिर्फ अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में अधिक निधि देने का आरोप लगाते हुए मांग की कि  अन्य तहसील को समान निधि वितरित किया जाए। विरोधी पक्ष के विधायक के निर्वाचन क्षेत्र  पर अन्याय न करते हुए न्यायपूर्वक निधि देने की मांग की। बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए दानवे ने कहा कि पालकमंत्री  ने  मैं जिले का जहागिरदार हूं, मेरे सहमति के बिना कोई काम नहीं हो सकेंगा।

इस तरह को जोश बैठक में पालकमंत्री ने दिखाने का प्रयास किया। परंतु, विरोधी पक्ष के नाते मैंने समान निधि वितरित करने की मांग कर उन्हें करारा जवाब दिया। सभी तहसीलों को समान निधि दिया जाए, ऐसा सरकारी नियम है, इस बात की याद भी दानवे ने बैठक में पालकमंत्री को दिलाई। उधर, कन्नड के विधायक उदयसिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि मैं शिंदे गुट के साथ न जाने से मेरे साथ निधि वितरण में भेदभाव की नीति अपनायी जा रही है।

मैंने बहुत दिनों तक अन्याय सह लिया है, अब हम अन्याय नहीं सहेंगे।इधर, पालकमंत्री के साथ राज्य के अल्पसंख्यक मंत्री अब्दुल सत्तार भी दानवे के आरोपों का जवाब बैठक में देने लगे। दानवे ने बैठक में चेताते हुए कहा कि मैं बाल ठाकरे का शिवसैनिक हूं। हम शांत नहीं बैठेंगे। मैंने पहले पालकमंत्री भुमरे के साथ काम किया है, इसलिए हम शांत बैठे थे। कोई दूसरा होता तो शिवसैनिक क्या होते है, यह हम दिखा देते। 

अन्य तहसील की तरह उतना ही निधि कन्नड को 

उधर, बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए पालकमंत्री संदिपान भुमरे ने साफ किया कि जितना निधि जिले के वैजापुर, सिल्लोड तथा गंगापुर तहसील को दिया गया, उतना ही निधि कन्नड तहसील को दिया गया। इससे यह साफ है कि सभी तहसीलों को समान निधि वितरित किया गया। यहां ठाकरे गुट व शिंदे गुट को कोई सवाल ही नहीं है। एक सवाल के जवाब में भुमरे ने साफ किया कि विरोधी पक्ष नेता का काम ही है कि वह जोरदार आवाज से अपने प्रशन रखें। इधर, राज्य के अल्पसंख्यक मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी मामले को शांत करने का प्रयास करते हुए साफ किया कि हमारे कोई विवाद नहीं है।

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